हो जाइए सावधान! चाहें कितना भी हो बदन दर्द कभी न खाए कॉम्बिफ्लेम

कॉम्बिफ्लेम भारत के लगभग हर घर में इस्तेमाल की जानी वाली दवाइयां हैं। कोई भी बीमारी हो जाए तो लोग सबसे पहले कहते हैं कि कॉम्बिफ्लेम खा लो। ये दवा हर तरह के दर्द के लिए आमतौर पर ली जाने वाली सबसे लोकप्रिय दर्द निवारक है। लेकिन इन दवाइयों के बारे में जो खुलासा हुआ है वो आपको हैरान कर देगा। हाल ही में किये गए टेस्ट में इन दवाइयों को घटिया करार दिया गया है।

दरअसल सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन के एक गुणवत्ता परीक्षण में 60 दवाइयां फेल हो गई हैं।

इनमें पेनकिलर के रूप में लिए जा रहे कॉम्बिफ्लेम का भी नाम शामिल है। इस टेस्‍ट में पाया गया कि अगर ये दवा मनुष्‍य के शरीर के अंदर जाती है तो वो कितनी देर में ब्रेकडाउन होती है यहीं पर कॉम्बिफ्लेम फेल हो गया है क्‍योंकि कॉम्बिफ्लेम की ब्रेकडाउन टाईम ज्यादा निकली।

इसके प्रयोग से मरीज को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। बिमारियों में खासकर पेट के अंदर ब्लीडिंग, लूजमोशन्स और गैस्टो-इन्टेस्टाइनल हो सकती है। कंपनी की माने तो इसने जून और जुलाई 2015 बैच की दवाईयां वापस मंगवाली है। इसके अलावा दो और बैच भी है जो टेस्ट में फेल हुई हैं। सैंपल टेस्ट में फेल होने की वजह से फ्रेंच फार्मा कंपनी सनोफी ने भारत में कॉम्बिफ्लेम के 4 बैच वापस मंगाने का फैसला किया है।

इसलिए कॉम्बिफ्लेम की ऐसी कई खेप बाजारों से वापस ली जा रही है क्योंकि इन बैचों की दवा को सस्ती क्वालिटी का पाया जा रहा है।
कॉम्बिफ्लेम में पैरासिटामोल और आईबूप्रोफेन का कॉम्बिनेशन है और यह भारत में सनोफी के पांच सबसे बड़े ब्रांडों में से एक है।सीडीएससीओ ने इन दवाओं के जिन बैचों को निम्न क्वालिटी का माना है,

इस दवा के जिन बैचेज़ को खतरनाक माना गया है वो जून 2015 से जुलाई 2015 के दरमियान मैन्यूफैक्चर हुए हैं। इनकी एक्सपायरी डेट मई 2018 और जून 2018 दी गई है।

Inderpreet Sharma